Gawar Ki Unnat Kheti

Gawar Ki Unnat Kheti – नमस्कार प्यारे किसान भाई, आज की पोस्ट में हम ग्वार की उन्नत खेती (Gawar Ki Unnat Kheti) के बारे में जानकारी शेयर करने वाले है इसके साथ ही आपको ग्वार की उन्नत किस्मे (Gawar ki unnat kisme) के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। शुष्क और अर्ध शुष्क वाले भाग में ग्वार एकमात्र ऐसी फसल है जिसके माध्यम से किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते है। भारत में ग्वार के मुख्य उत्पादन राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उतर प्रदेश और गुजरात राज्य है। देश के सम्पूर्ण ग्वार उत्पादन का लगभग 87 प्रतिशत उत्पादन राजस्थान में है।

  • ग्वार की उन्नत किस्मे (Gawar Ki Unnat Kisme)
  • ग्वार के बुवाई का समय (Guar sowing time)
  • ग्वार के लिए खेत की तैयारी (Preparation of field for guar)
  • खाद और उर्वरक (Manures and Fertilizers)
  • खरपतवार नियंत्रण (Weed control)
  • फसल सुरक्षा (Crop protection)
  • ग्वार की पैदावार (Guar yield)
Gawar Ki Unnat Kheti
Gawar Ki Unnat Kheti

ग्वार की फसल जमींन में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है जिससे भूमि और अधिक उपजाऊ होती है अथार्त जमीन की ताकत बढ़ जाती है। ग्वार की फसल होने के बाद, अगली फसल में हमेसा अधिक पैदावार होती है। 

ग्वार की उन्नत किस्मे (Gawar Ki Unnat Kisme)

  • आर.जी.सी. 986 – यह शाखा और मध्यम पकने वाली किस्म है जो सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयोगी है।
  • आर.जी.सी. 1002 – यह तेज पकने वाली किस्म की एक शाखा है। यह गैर-सिंचित और सिंचित दोनों स्थितियों के लिए उपयुक्त है।
  • आर.जी.सी. 1003 – यह एक त्वरित पकने वाली किस्म है जो सिंचित क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।
  • एच.जी. 365 – यह तेज पकने वाली किस्म है जो हरियाणा और राजस्थान के लिए उपयुक्त है।
  • एच.जी. 2-20 – यह एक त्वरित पकने वाली किस्म है जो असिंचित और सिंचित दोनों स्थितियों के लिए उपयुक्त है। सर्दियों के मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है।
  • अन्य किस्मे – बुन्देल ग्वार – 1, बुन्देल ग्वार – 2, बुन्देल ग्वार – 3, आर.जी.सी. 1031, आर.जी.सी. 1017, आर.जी.सी. 1066, आर.जी.सी. 1038, आर.जी.सी. 197, आर.जी.एम. 112 

ग्वार के बुवाई का समय (Guar sowing time)

ग्वार की बुवाई मानसून शुरुआत के बाद या जुलाई के पहले पखवाड़े में करनी चाहिए। 

ग्वार के लिए खेत की तैयारी (Preparation of field for guar)

ग्वार की खेती के लिए जलनिकास व उच्च उर्वरकता वाली दोमट मिटटी उत्तम रहती है। जमींन में गड्डे नहीं होना चाहिए क्युकी पानी एक जगह भरने से फसल को नुकसान होता है। इसके बाद टेक्टर से 2 – 3 जुताई या हैरो करना ठीक रहेगा। 

खाद और उर्वरक (Manures and Fertilizers)

प्रति हेक्टर 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 – 60 किलोग्राम फास्फोरस, मृदा जनित रोग से बचाने के लिए बीजो को 2 ग्राम थीरम व 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम के साथ बुवाई करे। 

खरपतवार नियंत्रण (Weed control)

पहली निराई गुड़ाई बुआई के 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दूसरी निराई 40 से 45 दिनों के बाद करनी चाहिए। एक ही समय में निराई करने से खरपतवार खत्म हो जाते हैं और साथ ही भूमि में हवा का प्रवाह भी अच्छा होता है।

ग्वार की पैदावार (Guar yield)

ग्वार की खेती से लगभग 300 क्विंटल हरा चारा, 12 – 17 क्विंटल दाना प्राप्त किया जा सकता है। 

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