मक्का की खेती कैसे करे पूरी जानकारी जाने। Makka Ki Kheti Kaise Kare In Hindi

मक्का की खेती कैसे करे पूरी जानकारी जाने। Makka Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 

Makka Ki Kheti Kaise Kare In Hindi – नमस्कार मेरे प्यारे किसान भाई आज हम आप Makka Ki Kheti के बारे में जानकारी शेयर करेंगे। सभी किसान  Makka Ki Kheti ki jankari जानना चाहते है और  Makka Ki Fasal कैसे तैयार करे। आज इस पोस्ट में Makka Ki Kheti Karne Ka Tarika, Makka Ki Kheti Ke Bare Mein Jankari, Makka Ki Kheti Kab Hoti Hai, और Makka Kheti Image सब कुछ जानने को मिलेगी तो लगातार बने रहे Kheti Business पर। 
Makka Ki Kheti Kaise Kare In Hindi
Makka Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 
मक्का की खेती खरीफ एवं जायद दोनों फसलो में की जा सकती है, मक्का की खेती चारा तथा दाना, दोनों के लिए की जाती है, साथ ही यह अल्प अवधि की फसल होने के कारण बहुफसली खेती के लिए इसका अत्यंत महत्व है। 

Makka Ki Kheti के लिए जलवायु और भूमि

मक्का की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आश्यकता होती है ?
मक्का की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु के साथ-साथ बुवाई के समय 18 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना आवश्यक है, इसकी अच्छी उपज हेतु दोमट या बलुई दोमट भूमि उपयुक्त होती है। 

Makka की प्रमुख प्रजातियाँ

मक्के की उन्नतशील प्रजातियाँ कौन कौन सी है ?

Makka Ki Kheti
Makka Ki Kheti


मक्के की बुवाई के लिए दो प्रकार की प्रजातियाँ पायी जाती है, एक तो सामान्य प्रजातियाँ जैसे की नवीन, स्वेता, कंचन, शक्ति-1, आजाद उत्तम, नव ज्योति, प्रभात, गौरव, प्रगति, यह प्रजातियाँ सामान्य या संकुल प्रजातियाँ है, दूसरी है संकर प्रजातियाँ जैसे की गंगा-2, गंगा-11, सरताज, प्रकाश, शक्तिमान-2, पूसा अगेती-2, जे एच-3459 यह संकर प्रजातियाँ पायी जाती है।

Makka के खेत की तैयारी

हमारे किसान भाई खेतो की तैयारी किस प्रकार करें ?
खेत की पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करने के बाद 2-3 जुताई देसी हल से या कल्टीवेटर से करनी चाहिए, आखिरी जुताई में 200 से 250 कुन्तल गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिला कर पाटा लगा देना चाहिए। 

Makka की बीज बुवाई

बुवाई का सही समय क्या है, बीजो का शोधन किस प्रकार से करें ?

Makka Ki Kheti
Makka Ki Kheti


मक्का की फसल की बुवाई मौसम के हिसाब से खरीफ में जून के अंत तक बुवाई कर लेना चाहिए, जायद में फरवरी के अन्त तक बुवाई कर लेना चाहिए, इससे की हमारी पैदावार पर कोई कुप्रभाव न पड़ सके, मक्के के बीज को बुवाई से पूर्व 1 किलो ग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम से शोधित करना अति आवश्यक है। 
फसल के बीजो की मात्रा कितनी होनी चाहिए तथा इसके लिए बुवाई का तरीका क्या है ?
सामान्य मक्का के लिए 18 से 20 किलोग्राम प्रति हैक्टर तथा संकर मक्का की बीज दर 12 से 15 किलोग्राम प्रति हैक्टर प्रयोग करना चाहिए, मक्का की बुवाई हल के पीछे 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर करे तथा लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर तथा पौध से पौध की दूरी 30 सेंटी मीटर रखनी चाहिए।

Makka Ki Kheti का पोषण प्रबंधन

फसल में खाद और उर्वरको का प्रयोग हमें कितनी मात्रा में करना चाहिए और कब करना चाहिए ?
मक्का की भरपूर उपज लेने के लिए संतुलित उर्वरको का प्रयोग करना आवश्यक है, मक्का की फसल के लिए खाद का प्रयोग खेत तैयारी के समय किया जाता है, उर्वरक में 120 किलो ग्राम नत्रजन, 60 किलो ग्राम फास्फोरस तथा 60 किलो ग्राम पोटाश तत्व के रूप में प्रयोग करते है, नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत तैयार करते समय प्रयोग करना चाहिए, शेष नत्रजन की आधी मात्रा को दो बार में खड़ी फसल में टापड्रेसिग के रूप प्रयोग करे, आधी मात्रा बुवाई के 25 से 30 दिन बाद शेष फूल आने के समय नत्रजन की मात्रा का प्रयोग करना चाहिए। 

Makka Ki Kheti का जल प्रबंधन

सिचाई करनी कब आवश्यक होती है, मक्का की खेती में ?
मक्का की दो फसलो में पैदावार की जाती है, जैसे खरीफ और जायद, मक्का की फसल में वर्षा ना होने की स्थिती में आवश्यकता अनुसार सिचाई करते रहना चाहिए, यह खरीफ में करना अति आवश्यक है, लेकिन जायद में 7-8 सिचाईयों की आवश्यकता पडती है, फिर भी आवश्यकतानुसार 10 से 12 दिन के अन्तराल पर सिचाई करते रहना चाहिए, जिससे की हमारी पैदावार पर कुप्रभाव ना पड़ सके। 

Makka Ki Kheti का खरपतवार प्रबंधन

मक्का की फसल में खरपतवार का नियंत्रण किस प्रकार करें ?
खरपतवार नियंत्रण हेतु बुवाई के तुरन्त बाद पेंडामेथलिन 30 ई.सी. की 3.3 किलोग्राम मात्रा प्रति हैक्टर 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए, जिससे की खरपतवार उग ना सके, फसल जब 20 से 25 दिन की हो जाए, तो निकाई करके भी खरपतवार नियत्रण किये जा सकते है।

Makka Ki Kheti का रोग प्रबंधन

कौन कौन से रोग मक्का की फसल को प्रभाबित करते है ?
मक्का की फसल में प्रमुख रोग जैसे की तुलसासित, पत्तियों का झुलसा रोग, सूत्रकृमि तथा तना सड़न रोग से फसल के बचाव के लिए जिनेब की 2.0 किलोग्राम मात्रा या जीरम 80% की 2.0 लीटर मात्रा पानी में घोलकर छिडकाव करें, तथा तना सड़न की रोकथाम के लिए 15 ग्राम स्टेपटोसाईक्लीन तथा 500 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड का प्रति हैक्टर छिडकाव करना चाहिए, जिससे की हमारे फसल में रोग प्रभावित ना कर सके। 

Makka Ki Kheti का कीट प्रबंधन

मक्का की फसल में कीटो से बचाव किस प्रकार से करे ?

Makka Ki Kheti
Makka Ki Kheti
मक्का की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट जैसे तना छेदक, पत्ती लपेटक कीट, टिड्डा तथा भुडली (कमला कीट) की रोकथाम के लिए डाइक्लोरवास 70 ई.सी. 650 मिलीलीटर मात्रा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करे या क्यूनालफास 1.5% धुल की 20 किलोग्राम मात्रा को फसल में प्रति हैक्टर के हिसाब से बुरकाव करे, जिससे की हमारे कीटों का प्रकोप ना हो सके और उपज पर कुप्रभाव ना पड़े।

Makka Ki Kheti की फसल कटाई

कटाई और उसकी मड़ाई किस प्रकार होती है, मक्का की फसल में ?
फसल पकने पर भुट्टो को ढकने वाली पत्तियां जब पीली पड़ने लगती है, इस अवस्था पर कटाई करनी चाहिए, भुट्टो की तुडाई करके धुप में अच्छी तरह सुखाकर, हाथ या मशीन द्वारा दाना निकालना चाहिए। अक्सर देखा गया है कि किसान भाई डंडे से पिटाई करके दाना निकलते है, इससे दाने की गुद्वता ख़राब हो जाती है, इसलिए डंडो से पिटाई करके दाना नहीं निकालना चाहिए

Makka की पैदावार

मक्के की फसल से प्रति हैक्टर कितनी उपज प्राप्त हो जाती है ?


मक्के की फसल से प्रति हैक्टर औसत उपज दाना सामान्य प्रजातियों से 35 से 40 कुन्तल तक प्राप्त होता है, यही पर संकर प्रजातियों से 40 से 45 कुन्तल प्रति हैक्टर दाना प्राप्त होती है।

दोस्तों आशा करता हु आज की पोस्ट में आप सभी को मक्के की खेती से जुडी सभी जानकारी मिल गई है फिर भी किसी प्रकार का सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है हम जल्द ही आप को जवाब देंगे। 

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