पपीता की खेती कैसे करे पूरी जानकारी। Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi

पपीता की खेती कैसे करे पूरी जानकारी। Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 

Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi – नमस्कार प्यारे किसान भाई आज की पोस्ट में हम पपीता की खेती के बारे में जानकारी देंगे जैसे Papita Ki Kheti Ki Jankari, Papita Ki Kheti Ki Unnat Kism क्या है, Papita Lagane Ki Vidhi, Papita Ki Kheti Kab Hoti Hai, Papita Ki Nursery कैसे तैयार करे आदि जानकारी मिलने वाली है। सभी किसान जानना चाहते है की Papita Ki Kheti Se Income कैसे करे तो आप सही जगह आये है बने रहे Kheti Business पर हम सभी जानकारी बताने वाले है। 
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 
पपीता शीघ्र ही तैयार होने वाला बहुत ही उपयोगी फल है इसमे बहुत ही पौष्टिक गुण पाए जाते है हमारे देश में पपीता गृह वाटिका में उगाना प्रचलित है इसकी पैदावार शीतकटिबन्धीय क्षेत्रो को छोड़कर पूरे देश में की जाती है लेकिन अब इसकी खेती व्यवसायक रूप में की जाती है यह स्वस्थ के लिए बहुत ही लाभदायक होता है इसमे पपेन एवं पैक्टिन नामक पदार्थ पाया जाता है पपीते का दवाइयों में प्रयोग किया जाता है पपेन पपीते के कच्चे फलो से निकल जाता है इसे एक बार लगा देने पर दो फसल ली जाती है इसकी कुल आयु पौने तीन साल होती है।

Papita Ki Kheti के लिए जलवायु और भूमि

पपीते की खेती के लिए किस प्रकार की अनुकूल जलवायु और भूमि होनी चाहिए?
पपीते की सबसे अच्छी फसल उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रो में होती है। लेकिन समशीतोष्ण क्षेत्रो में भी अच्छी पैदावार देता है। शुष्क गर्म जलवायु में इसके फल अधिक मीठे होते है परन्तु अधिक नमी इसके फलो के गुणों को ख़राब कर देती है। पपीता किसी भी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है लेकिन इसकी सबसे अच्छी खेती जीवांश युक्त एवं उचित जल निकास वाली बलुई दोमट एवम दोमट मिट्टी में की जाती है।

Papita की प्रमुख प्रजातियाँ

पपीते की खेती करने के लिए कौन सी उन्नतशील प्रजातियाँ है जिनका इस्तेमाल हम अपनी खेती में करे?
उन्नतशील प्रजातियाँ जैसे की पूसा डेलीसस 1-15, पूसा मैजिस्टी 22-3, पूसा जायंट 1-45-वी, पूसा ड्वार्फ1-45-डी, पूसा नन्हा या म्युटेंट डुवार्फ, सी०ओ०-1, सी०ओ०-2, सी०ओ०-3, सी०ओ०-4, कुर्ग हनी, एवम हनीडीयू ये उन्नतशील प्रजातियाँ उपलब्ध है।

Papita की पौधशाला

पपीते की पौध किस प्रकार तैयार करे?
पपीते की खेती में पौध तैयार करने के लिए पहले पौधे 3 मीटर लम्बी 1 मीटर चौड़ी तथा 10 सेमी० ऊँची क्यारी में या गमले या पालीथीन बैग में पौध तैयार करते है। बीज क़ी बुवाई से पहले क्यारी को 10% फार्मल्डिहाइड के घोल का छिडकाव करके उपचारित करते है। इसके बाद बीज 1 सेमी० गहरे तथा 10 सेमी० क़ी दूरी पर बीज बोते है इन पौधों को रोपाई हेतु 60 दिन बाद जब 15-25 सेमी० ऊँचे हो जाये तब इनकी पौध की रोपाई करनी चाहिए।

Papita का पौधरोपण

पपीता के पौधों का रोपण किस प्रकार करे?
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 

भारत में पपीता की तीन मौसम में रोपाई क़ी जाती है तथा पौध उसी तरह से 60 दिन पहले तैयार क़ी जाती है सबसे पहले जून एवम जुलाई में, इसके बाद सितम्बर -अक्टूबर में तथा अंत में फरवरी एवम मार्च में रोपण किया जाता है दक्षिण भारत मे साधारणत् फरवरी -मार्च में रोपाई क़ी जाती है खेत में पौधों क़ी रोपाई दोपहर बाद 3 बजे सायं से करनी चाहिए। रोपाई के बाद पानी लगाना अतिआवश्यक है तैयार किए गए गढ़ढ़ो में प्रत्येक गढढ़ो में 2 या 3 पौधे थोड़ी थोड़ी दूरी पर लगाना चाहिए जब तक अच्छी तरह से पौधे स्थापित न हो जाये तब तक प्रतिदिन 3 बजे सायं के बाद हल्की सिचाई करनी चाहिए फूल आने पर 10% नर पौधे को छोड़ कर सभी नर पौधे को काट कर अलग कर देना चाहिए।

Papita Ki Kheti का पोषण प्रबंधन

रोपाई के बाद बारी आती है खाद एवं उर्वरको के प्रयोग की तो डाक्टर यादव ये बताईये की उनकी कितनी मात्रा प्रयोग करनी चाहिए और कब करनी चाहिए?
पपीता एक शीघ्र बढने एवं फल देने वाला पौधा है जिसके करण आधिक तत्व क़ी आवश्यकता पड़ती है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 250 ग्राम नत्रजन 150 ग्राम फास्फोरस तथा 250 ग्राम पोटाश प्रति पौधा के हिसाब से प्रति वर्ष देना चाहिए यह मात्रा पौधे के चारो और 2 से 4 बार में थोड़े -थोड़े समय के अन्तराल पर देनी चाहिए।
पपीते के पौधे पर कब और कैसे और कितनी मिट्टी चढ़ानी चाहिए ?
पपीते पर मिट्टी चढाना अतिआवश्यक है। प्रत्येक गढ्ढे में एक पौधा को रखने के बाद पौधे क़ी जड़ के आस पास 30 सेमी० क़ी गोलाई में मिट्टी को ऊँचा चढ़ा देते है ताकि पेड़ के पास सिचाई का पानी आधिक न लग सके तथा पौधे को सीधा खड़ा रखते है।

Papita Ki Kheti का जल प्रबंधन

पपीते क़ी फसल में कब और कितनी मात्रा में सिचाई देनी चाहिए?
पपीता के लिए सिचाई का उचित प्रवंन्ध होना आवश्यक है गर्मियों में 6 से 7 दिन के अन्तराल पर तथा सर्दियों में 10-12 दिन के अन्तराल पर सिचाई करनी चाहिए वर्षा ऋतू में पानी न बरसने पर आवश्यकता अनुसार सिचाई करनी चाहिए सिचाई का पानी पौधे के सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए।

Papita Ki Kheti का खरपतवार प्रबंधन

पपीते क़ी फसल में निराई और गुड़ाई हमें कैसे करनी चाहिए?
लगातार सिचाई करते रहने से खेत के गढ़ढ़ो क़ी मिट्टी बहुत कड़ी हो जाती है। जिससे पौधे क़ी वृद्धि पर कुप्रभाव पड़ता है अत: हर 2-3 सिचाई के बाद थालो क़ी हल्की निराई गुड़ाई करनी चाहिए, जिससे भूमि में हवा एवं पानी का अच्छा संचार बना रहे।

Papita Ki Kheti का रोग प्रबंधन

पपीते क़ी फसल में कौन कौन से रोग लगते है और उनका नियंत्रण किस प्रकार करना चाहिए?
पपीते के पौधों में मुजैक,लीफ कर्ल ,डिस्टोसर्न, रिंगस्पॉट, जड़ एवं तना सडन ,एन्थ्रेक्नोज एवं कली तथा पुष्प वृंत का सड़ना आदि रोग लगते है। इनके नियंत्रण में वोर्डोमिक्सचर 5:5:20 के अनुपात का पेड़ो पर सडन गलन को खरोचकर लेप करना चाहिए अन्य रोग के लिए व्लाईटाक्स 3 ग्राम या डाईथेन एम्-45, 2 ग्राम प्रति लीटर अथवा मैन्कोजेब या जिनेव 0.2% से 0.25 % का पानी में घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए अथवा कापर आक्सीक्लोराइट 3 ग्राम या व्रासीकाल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिए।

Papita Ki Kheti का कीट प्रबंधन 

पपीते के पौधों को कीटो से कम नुकसान पहुचता है फिर भी कुछ कीड़े लगते है जैसे माहू, रेड स्पाईडर माईट, निमेटोड आदि है। नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 ई. सी.1.5 मिली लीटर या फास्फोमिडान 0.5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से माहू आदि का नियंत्रण होता है।

Papita की फसल कटाई

जब फसल हमारी पूरी तरह तैयार हो जाती है तो उसकी तुड़ाई का सही समय क्या है और यह तोड़ाई किस प्रकार करे ?
फलो के पकने पर चिडियों से बचाना अति आवश्यक है अत: फल पकने से पहले ही तोडना चाहिए जब फलो के ऊपरी सतह पर खरोच कर देखे तो दूध जैसा तरल पदार्थ क़ी पानी जैसा निकले और फल का रंग परिवर्तित होने लगे तब समझ लेना चाहिए कि फल पक गए है और तुड़ाई कर लेना चाहिए फलो को तोड़ते समय किसी प्रकार कि खरोच या दाग धब्बे आदि न पड़ने पाए नहीं तो फल सड़कर ख़राब हो जाते है।
पपीता क़ी फलो क़ी तुड़ाई के लेने के बाद बाजार ले जाने हेतु पैकिग की व्यवस्था किस प्रकार करे?
फलो को सुरक्षित तोड़ने के बाद फलो पर कागज या अख़बार आदि से लपेट कर अलग अलग प्रति फल को किसी लकड़ी या गत्ते के बाक्स में मुलायम कागज क़ी कतरन आदि को बिछाकर फल रखने चाहिए और बाक्स को बन्द करके बाजार तक भेजना चाहिए ताकि फल ख़राब न हो और अच्छे भाव बाजार में मिल सके।

Papita की पैदावार

पपीता कि पैदावार या उसकी उपज के लिए प्रति पौधा तथा प्रति हेक्टर कितनी मात्रा हमारे किसान भाई प्राप्त कर लेते है?
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi
Papita Ki Kheti Kaise Kare In Hindi 
पैदावार मिट्टी किस्म, जलवायु और उचित देखभाल पर निर्भर करती है समुचित व्यवस्था पर प्रति पेड़ एक मौसम में औसत उपज में फल 35-50 किग्रा प्राप्त होते है तथा 15-20 टन प्रति हेक्टर उपज प्राप्त होती है।
सभी किसान भाईओ से आशा करता हु हमारे द्वारा दी गई जानकारी बहुत ही फायदेमंद रही है इसके अलावा आप के मन में कोई अन्य सवाल है तो आप हमे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है हम  का जवाब देंगे। 
भारत का नंबर 1 कृषि पोर्टल जहा पर सभी जानकारी एक क्लिक पर आप की पसंद हमारी मेहनत खेती बिज़नेस 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *